कहमुक़री
कहमुक़री हिंदी साहित्य की चुलबुली और पहेलीनुमा कविताएं 1 चोली अंग अंग लिपटे तन भावे। चोर नज़र से मुझे बचावे। सं…
कहमुक़री हिंदी साहित्य की चुलबुली और पहेलीनुमा कविताएं 1 चोली अंग अंग लिपटे तन भावे। चोर नज़र से मुझे बचावे। सं…
School सुबह उठते ही करो गुड मोर्निंग फिर हों बाकि काम दांत सफाई मुँह हाथ धोना ये सब होंगे काम पेन पेन्सिल बुक नोटब…
Books friends वो बता देती हैं अपने मन की सब बातें मुझे और मैं सुनता रहता हूँ एक अच्छे दोस्त की तरह मैं भी बताने लगता ह…
Destination मन्जिलें न थीं थीं बस राहें बाँहे फ़ैलाए। चलता रहा बेवज़ह या वजह के लिए, यूँ ही एक मोड़ पर ठिठके कदम पीछे मुड़…
Sympathy समाज ने एक शब्द गढ़ा सहानुभूति संसार के समस्त दिव्यांग दर्द से कराह उठे, समाज ने दर्द कहा वैश्याएं और दमित…
Mausam ghazal वो मेरे आस पास क्या आया एक मौसम सुहावना आया जिससे बातें तमाम करनी थी मैं उसे देखकर चला आया पहले तन…
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Fake faces, mask मैं दूर कहीं पगडंडी पर बैठा, निहार रहा था क्षितिज को । शून्यता थी चेहरे पर उसके, और कोई नकली भाव नही…
Dry leaves वक़्त की शाख पर सूखे पत्ते लगे हैं ज़रा सी सरसराहट से थरथरा उठते हैं कभी मौसम की…